Bhagwan Shiva is one of the principal deities of Hinduism and a member of the Holy Trinity (Trimurti) along with Brahma and Vishnu.
In the cosmic order, Brahma is the creator, Vishnu is the preserver, and Shiva is the destroyer and transformer.
Lord Shiva represents destruction not as an end, but as a necessary process for renewal and transformation.
He is known as Mahadev and is worshipped as the embodiment of power, compassion, and meditation.
Bhagwan Shiva resides on Mount Kailash and is often seen in deep meditation.
Shiva Tandava Stotram is a powerful and rhythmic hymn composed by Ravana, describing the cosmic dance of Lord Shiva.
It glorifies Shiva’s immense power, beauty, and divine energy through intense poetic expressions.
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले । गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ॥ डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं । चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥१॥ जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी । विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ॥ धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके । किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥२॥ धराधरेन्द्रनन्दिनी विलासबन्धुबन्धुर । स्फुरद्दिगन्तसन्तति प्रमोदमानमानसे ॥ कृपाकटाक्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि । क्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥ जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा । कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ॥ मदान्धसिन्धुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे । मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥४॥ सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर । प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ॥ भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः । श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥५॥ ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा । निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ॥ सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं । महाकपालिसम्पदे शिरोजटालमस्तु नः ॥६॥ करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वलत् । धनञ्जयाधरीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ॥ धराधरेन्द्रनन्दिनी कुचाग्रचित्रपत्रक । प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥ नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत् । कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ॥ निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः । कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः ॥८॥ प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा । वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ॥ स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं । गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥९॥ अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी । रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ॥ स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं । गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥१०॥ जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमस्फुरत् । धगद्धगद्धगज्ज्वलत्करालभालहव्यवाट् ॥ धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल । ध्वनिक्रमप्रवर्तितप्रचण्डताण्डवः शिवः ॥११॥ दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर् । गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ॥ तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेंद्रयोः । समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥ कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् । विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन् ॥ विमुक्तलोललोचनो ललाटफाललग्नकः । शिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥१३॥ इमं हि नित्यमेव मुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं । पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति सन्ततम् ॥ हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं । विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिन्तनम् ॥१४॥ पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं । यः शम्भुपूजनमिदं पठति प्रदोषे ॥ तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां । लक्ष्मीं सदा सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥१५॥
Shiva Mahimna Stotram is one of the most famous hymns dedicated to Lord Shiva.
It was composed by Pushpadanta, a Gandharva, and beautifully describes the limitless glory and greatness of Lord Shiva.
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी । स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः ॥ अथावाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन् । ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः ॥१॥ अतीतः पन्थानं तव च महिमा वाङ्मनसयोः । अतद्व्यावृत्त्या यं चकितमभिधत्ते श्रुतिरपि ॥ स कस्य स्तोतव्यः कतिविधगुणः कस्य विषयः । पदे त्वर्वाचीने पतति न मनः कस्य न वचः ॥२॥ मधुस्फीता वाचा परममृतं निर्मितवता । तव ब्रह्मन् किं वागपि सुरगुरो विस्मयपदम् ॥ मम त्वेतां वाणीं गुणकथनपुण्येन भवतः । पुनामीत्यर्थेऽस्मिन् पुरमथन बुद्धिर्व्यवसिता ॥३॥ तवैश्वर्यं यत्तज्जगदुदयरक्षाप्रलयकृत् । त्रयीवस्तु व्यस्तं तिसृषु गुणभिन्नासु तनुषु ॥ अभव्यानामस्मिन् वरद रमणीयामरमणीं । विहन्तुं व्याक्रोशीं विदधति इह केचिज्जडधियः ॥४॥ किमीहः किं कायः स खलु किमुपायस्त्रिभुवनम् । किमाधारो धाता सृजति किमुपादान इति च ॥ अतर्क्यैश्वर्ये त्वय्यनवसरदुःस्थो हतधियः । कुतर्कोऽयं कांश्चित् मुखरयति मोहाय जगतः ॥५॥ अजन्तु लोकाः किमवयववन्तोऽपि जगताम् । अधिष्ठातारं किं भवविधिरनादृत्य भवति ॥ अनीशो वा कुर्याद् भुवनजनने कः परिकरः । यतो मन्दास्त्वां प्रत्यभिमुखमपि सन्देहयति ॥६॥ त्रयी सांख्यं योगः पशुपतिमतं वैष्णवमिति । प्रभिन्ना भिन्ना पन्थानः पथि परतरो न हि ॥ रुचीनां वैचित्र्याद् ऋजुकुटिलनानापथजुषाम् । नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव ॥७॥ महाक्षः खट्वाङ्गं परशुरजिनं भस्म फणिनः । कपालं चेतीयत्तव वरद तन्त्रोपकरणम् ॥ सुरास्तां तामृद्धिं दधति तु भवद्भ्रूप्रणिहिताम् । न हि स्वात्मारामं विषयमृगतृष्णा भ्रमयति ॥८॥ ध्रुवं कश्चित्सर्वं सकलमपरस्त्वध्रुवमिदं । परो ध्रौव्याध्रौव्ये जगति गदति व्यस्तविषये ॥ समस्तेऽप्येतस्मिन् पुरमथन तैर्विस्मित इव । स्तुवञ्जिह्रेेमि त्वां न खलु ननु धृष्टा मुखरता ॥९॥ तवैश्वर्यं यत्नाद्यदुपरि विरिञ्चिर्हरिरधः । परिच्छेतुं यातावनलमनलस्कन्धवपुषः ॥ ततो भक्तिश्रद्धाभरगुरुगृणद्भ्यां गिरिश यत् । स्वयं तस्थे ताभ्यां तव किमनुवृत्तिर्न फलति ॥१०॥
Rudrashtakam is a powerful devotional hymn dedicated to Lord Shiva, composed by Goswami Tulsidas.
It beautifully describes the formless, infinite, and compassionate nature of Lord Shiva.
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥ निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥१॥ निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिरा ज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ॥ करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥२॥ तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्रीशरीरम् ॥ स्फुरन्मौलिकल्लोलिनीचारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दुकण्ठे भुजङ्गा ॥३॥ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥ मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥४॥ प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ॥ त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥५॥ कलातीतकल्याणकल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥ चिदानन्दसन्दोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥६॥ न यावदुमानाथ पादारविन्दं । भजन्ति हि लोके परे वा नराणाम् ॥ न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥७॥ न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ॥ जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥८॥
Shiva Ashtakam is a devotional hymn of eight verses dedicated to Lord Shiva.
It glorifies the divine form, qualities, and supreme nature of Mahadev.
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं । जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम् ॥ भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥१॥ गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं । महाकालकालं गणेशादिपालम् ॥ जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥२॥ मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं । महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम् ॥ अनादिं ह्यपारं महामोहमारं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥३॥ वटाधो निवासं महाट्टाहहासं । महापापनाशं सदासुप्रकाशम् ॥ गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥४॥ गिरीन्द्रात्मजासंगृहीतार्धदेहं । गिरौ संस्थितं सर्वदा सन्निगूढम् ॥ परब्रह्मब्रह्मादिभिर्वन्द्यमानं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥५॥ कपालं त्रिशूलं कराभ्यां दधानं । पदाम्भोजयुग्मं भजेऽहं सदैव ॥ बलीवर्दयानं सुराणां प्रधानं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥६॥ शरच्चन्द्रगात्रं गणानन्दपात्रं । त्रिनेत्रं पवित्रं धनेशस्य मित्रम् ॥ अपर्णाकलत्रं सदा सच्चरित्रं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥७॥ हरं सर्पहारं चिताभूविहारं । भवं वेदसारं सदा निर्विकारम् ॥ श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं । शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीढे ॥८॥
Shiva Chalisa is a devotional prayer of forty verses dedicated to Lord Shiva.
Devotees chant this Chalisa to seek blessings, protection, and spiritual growth.
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन । मंगल मूल सुजान ॥ कहत अयोध्यादास तुम । देहु अभय वरदान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजापति दीन दयाला । सदा करत संतों प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाये ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहैं तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायो । लव निमेष महं मार गिरायो ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहि कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदा ही ॥ वेद नाम महिमा तव गाई । अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला । जरे सुरासुर भये विहाला ॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहि पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चह सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिये इच्छित वर ॥ जय जय जय अनंत अविनाशी । करत कृपा सबके घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मात पिता भ्राता सब कोई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु अब संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदा ही । जो कोई जाने सो फल पाही ॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । विघ्न विनाशन मंगल कारण ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । नारद शारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ ॥ दोहा ॥ नित्य नेम कर प्रातः ही । पाठ करौं चालीसा ॥ तुम मेरी मनोकामना । पूर्ण करो जगदीश ॥
Shiva Kavach is a sacred protective hymn dedicated to Lord Shiva.
It is believed to shield devotees from negative energies, fears, and obstacles while granting strength, courage, and divine protection.
अस्य श्रीशिवकवचस्तोत्रमहामन्त्रस्य । ऋषिः वामदेवः । छन्दः अनुष्टुप् । देवता श्रीसदाशिवः । बीजं ह्रीं । शक्तिः क्लीं । कीलकं सौः । शिवकवचपाठे विनियोगः ॥ करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा । श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ॥ विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व । जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ शिरो मे सर्वदा पातु शम्भुः शशिशेखरः । भालं पातु महेशानः नेत्रे मे त्रिलोचनः ॥ कर्णौ पातु गिरिजानाथः नासिकां विश्वनाथकः । मुखं पातु महादेवः कण्ठं पातु नीलकण्ठः ॥ भुजौ पातु पिनाकी मे करौ पातु शूलधृक् । हृदयं पातु शर्वो मे नाभिं पातु पशुपतिः ॥ कटिं पातु जगन्नाथः ऊरू पातु महेश्वरः । जानुनी पातु भोलेशः जङ्घे पातु महाबलः ॥ पादौ पातु सदाशिवः सर्वाङ्गं शिव एव च । रक्षाहीनं यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु ॥ तत्सर्वं रक्ष मे देव सर्वतो मां नमोऽस्तु ते ॥
Shiva Panchakshara Stotram is a sacred hymn composed by Adi Shankaracharya.
It is based on the powerful mantra “Om Namah Shivaya” and glorifies Lord Shiva through each syllable.
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय । भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ॥ नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय । तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥१॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय । नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ॥ मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय । तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥२॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय । दक्षाध्वरनाशकाय श्रीनिलकण्ठाय ॥ वृषध्वजाय शशिधराय नमः शिवाय । तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥३॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनिन्द्रदेव । अर्चितशेखराय चन्द्रशेखराय ॥ त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥४॥ यज्ञस्वरूपाय जटाधराय । पिनाकहस्ताय सनातनाय ॥ दिव्याय देवाय दिगम्बराय । तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥५॥
Kalabhairava Ashtakam is a powerful hymn composed by Adi Shankaracharya in praise of Lord Kalabhairava, a fierce form of Lord Shiva.
It is believed to remove fear, negativity, and obstacles, and grant protection and spiritual strength.
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं । व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ॥ नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥१॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं । नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ॥ कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥२॥ शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं । श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ॥ भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥३॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं । भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ॥ विनिक्वणन्मनोहरहेमकिङ्किणीलसत्कटिं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥४॥ धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं । कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम् ॥ स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥५॥ रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं । नित्यं अद्वितीयमीष्टदैवतं निरञ्जनम् ॥ मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥६॥ अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं । दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् ॥ अष्टसिद्धिदायकं कपाळमालिकाधरं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥७॥ भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं । काशिवासिलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ॥ नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं । काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥८॥
Mahamrityunjaya Mantra is one of the most powerful and sacred mantras dedicated to Lord Shiva.
It is chanted for healing, protection, longevity, and liberation from fear and suffering.
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
Shiva Gayatri Mantra is a powerful Vedic mantra dedicated to Lord Shiva.
It is chanted for spiritual awakening, inner peace, wisdom, and divine blessings.
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
Dakshinamurthy Stotram is a profound philosophical hymn composed by Adi Shankaracharya.
It praises Lord Shiva as the supreme teacher (Guru) who imparts knowledge through silence.
मौनव्याख्या प्रकटित परब्रह्मतत्त्वं युवानं । वर्षिष्ठान्तेवसदृषिगणैरावृतं ब्रह्मनिष्ठैः ॥ आचार्येन्द्रं करकलित चिन्मुद्रमानन्दरूपं । स्वात्मारामं मुदितवदनं दक्षिणामूर्तिमीडे ॥१॥ विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजान्तर्गतम् । पश्यन्नात्मनि मायया बहिरिवोद्भूतं यथा निद्रया ॥ यः साक्षात्कुरुते प्रबोधसमये स्वात्मानमेवाद्वयं । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥२॥ बीजस्यान्तर्विवाङ्कुरो जगदिदं प्राङ्निर्विकल्पं पुनः । मायाकल्पितदेशकालकलना वैचित्र्यचित्रीकृतम् ॥ मायावीव विजृम्भयत्यपि महायोगीव यः स्वेच्छया । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥३॥ यस्यैव स्फुरणं सदात्मकमसत्कल्पार्थकं भासते । साक्षात्तत्त्वमसीति वेदवचसा यो बोधयत्याश्रितान् ॥ यत्साक्षात्करणाद्भवेन न पुनरावृत्तिर्भवाम्भोनिधौ । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥४॥ नानाछिद्रघटोदरस्थितमहादीपप्रभाभास्वरं । ज्ञानं यस्य तु चक्षुरादिकरणद्वारा बहिः स्पन्दते ॥ जानामीति तमेव भान्तमनुभात्येतत्समस्तं जगत् । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥५॥ देहं प्राणमपीन्द्रियाण्यपि चलां बुद्धिं च शून्यं विदुः । स्त्रीबालान्धजडोपमास्त्वहमिति भ्रान्ता भृशं वादिनः ॥ मायाशक्तिविलासकल्पितमहाव्यामोहसंहारिणे । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥६॥ राहुग्रस्तदिवाकरेंदुसदृशो मायासमाच्छादनात् । सन्मात्रः करणोपसंहरणतो योऽभूत्सुषुप्तः पुमान् ॥ प्रागस्वाप्समिति प्रबोधसमये यः प्रत्यभिज्ञायते । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥७॥ बाल्यादिष्वपि जाग्रदादिषु तथा सर्वास्ववस्थास्वपि । व्यावृत्तास्वनुवर्तमानमहमित्यन्तः स्फुरन्तं सदा ॥ स्वात्मानं प्रकटीकरोति भजतां यो मुद्रया भद्रया । तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये ॥८॥
Ardhanarishwara Stotram is a beautiful hymn that praises Lord Shiva in his Ardhanarishwara form — half Shiva and half Goddess Parvati.
This form symbolizes the perfect union of masculine and feminine energies, representing balance, harmony, and creation.
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय । धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥१॥ कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै चितारजःपुञ्जविचर्चिताय । कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥२॥ रुणत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणिनूपुराय । हेमाङ्गदायै भुजगाङ्गदाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥३॥ विशालनिलोत्पललोचनायै विकासिपङ्केरुहलोचनाय । समेक्षणायै विषमेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥४॥ मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालाङ्कितकन्धराय । दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥५॥ अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय । निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥६॥ प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय । जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥७॥ प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय । शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥८॥