प्रमुख हिंदू पर्वों के महत्व, क्षेत्र, आराध्य, तिथि, व्रत, पूजा और मंत्रों के साथ राज्यवार धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएँ तथा सिख धर्म के प्रमुख गुरपुरब और स्मरण दिवस।
क्षेत्र: लगभग सम्पूर्ण भारत; नेपाल तथा विश्वभर के हिन्दू समुदायों में भी।
किससे जुड़ी है: मुख्यतः माता लक्ष्मी और भगवान गणेश। उत्तर भारतीय परंपरा में श्रीराम के अयोध्या लौटने से भी जोड़ी जाती है; अलग-अलग क्षेत्रों में काली पूजा, गोवर्धन पूजा आदि परंपराएँ भी जुड़ी हैं।
कब: कार्तिक अमावस्या के आसपास। व्यापक दीपावली पर्व कई क्षेत्रों में धनतेरस से भाई दूज तक लगभग 5 दिन चलता है।
मुख्य क्रम: धनतेरस → नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली → लक्ष्मी पूजन/दीपावली → गोवर्धन पूजा/अन्नकूट → भाई दूज।
क्या करें: घर की स्वच्छता, दीप प्रज्वलन, लक्ष्मी-गणेश पूजन, सात्त्विक भोजन, दान, जरूरतमंदों की सहायता और परिवार के साथ पूजा।
व्रत: दीपावली पर सार्वभौमिक रूप से अनिवार्य उपवास नहीं है। परिवार/संप्रदाय के अनुसार लक्ष्मी-पूजन तक संयम या उपवास किया जाता है।
सरल मंत्र:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ गं गणपतये नमः।
धनतेरस में भगवान धन्वंतरि की आराधना की परंपरा भी है। दीपावली से संबंधित लक्ष्मी, गणेश, धन्वंतरि और गोवर्धन की अलग-अलग पूजा-विधियाँ प्रचलित हैं। Drik Panchang
क्षेत्र: विशेष रूप से उत्तर भारत, ब्रज, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, गुजरात; आज पूरे भारत में।
आस्था: भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा; ब्रज में राधा-कृष्ण की होली का विशेष महत्व।
कब: फाल्गुन पूर्णिमा।
अवधि: मुख्यतः 2 दिन—होलिका दहन और रंगवाली होली; ब्रज जैसे क्षेत्रों में उत्सव कई दिनों तक चलता है।
महत्व: भक्त प्रह्लाद की कथा धर्म और भक्ति की विजय के प्रतीक के रूप में स्मरण की जाती है।
क्या करें: होलिका पूजन, अग्नि की परिक्रमा की स्थानीय परंपरा, अगले दिन रंग-गुलाल, परिवार-सामाजिक मिलन और राधा-कृष्ण भक्ति।
व्रत: सामान्यतः अनिवार्य उपवास नहीं।
मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
क्षेत्र: सम्पूर्ण भारत; विशेष महत्व शिव मंदिरों एवं ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों में।
देवता: भगवान शिव।
कब: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी।
अवधि: एक दिन और विशेष रूप से रात्रि।
क्या करें: स्नान, शिवलिंग अभिषेक, जल अर्पण, बिल्वपत्र, दीप, शिव-पूजन, जप तथा रात्रि-जागरण की परंपरा।
व्रत: श्रद्धालु निराहार, फलाहार या अपनी क्षमता के अनुसार उपवास रखते हैं। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार कठोर उपवास आवश्यक नहीं मानना चाहिए।
मुख्य मंत्र:
ॐ नमः शिवाय।
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को पड़ती है। Drik Panchang
क्षेत्र: पूरे भारत में; अयोध्या और राम-भक्ति परंपरा वाले क्षेत्रों में विशेष।
देवता: भगवान श्रीराम।
कब: चैत्र शुक्ल नवमी।
महत्व: भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में।
क्या करें: श्रीराम पूजा, रामचरितमानस/रामायण पाठ, राम नाम जप, भजन-कीर्तन।
व्रत: बहुत से भक्त दिनभर उपवास या फलाहार करते हैं और राम जन्मोत्सव के बाद पारण करते हैं; स्थानीय परंपरा अलग हो सकती है।
मंत्र:
ॐ श्री रामाय नमः।
या सरल नाम-जप:
श्री राम जय राम जय जय राम।
क्षेत्र: पूरे भारत में; तिथि/परंपरा क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती है।
देवता: भगवान हनुमान।
महत्व: हनुमानजी के प्राकट्य/जन्म का उत्सव।
क्या करें: हनुमान पूजन, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, राम नाम जप और सेवा।
मंत्र:
ॐ हनुमते नमः।
क्षेत्र: सम्पूर्ण भारत; मथुरा-वृंदावन, द्वारका, महाराष्ट्र, गुजरात, मणिपुर आदि में विशेष।
देवता: भगवान श्रीकृष्ण।
कब: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी।
अवधि: मुख्य उत्सव एक दिन/रात्रि; कुछ क्षेत्रों में अगले दिन नंदोत्सव।
क्या करें: कृष्ण पूजन, भजन, गीता पाठ, श्रीकृष्ण कथा, मध्यरात्रि जन्मोत्सव।
व्रत: भक्त सामान्यतः उपवास/फलाहार रखते हैं और कृष्ण जन्म के पश्चात या अगले दिन परंपरा के अनुसार पारण करते हैं।
मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ कृष्णाय नमः।
क्षेत्र: सम्पूर्ण भारत।
देवी: माँ दुर्गा के नौ स्वरूप।
कब: आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी; विजयादशमी अगले चरण का प्रमुख पर्व।
अवधि: नौ रातें/दस दिन।
नौ देवियाँ: शैलपुत्री → ब्रह्मचारिणी → चंद्रघंटा → कूष्मांडा → स्कंदमाता → कात्यायनी → कालरात्रि → महागौरी → सिद्धिदात्री।
नवरात्रि में घटस्थापना, नौ दुर्गाओं की पूजा, ज्योति, कन्या पूजन और कई परंपराओं में नौ दिन व्रत प्रमुख हैं। Drik Panchang
व्रत: फल, दूध, फलाहार और परंपरागत व्रत-आहार; कई लोग अन्न का त्याग करते हैं। अष्टमी/नवमी को कन्या पूजन की परंपरा है।
मंत्र:
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
प्रसिद्ध देवी प्रार्थना:
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
क्षेत्र: पूरे भारत में।
आस्था: अलग-अलग परंपराओं में श्रीराम की विजय तथा देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से संबद्ध।
कब: आश्विन शुक्ल दशमी।
क्या करें: श्रीराम/देवी पूजा, शस्त्र-पूजन/आयुध पूजा की क्षेत्रीय परंपरा, नया शुभ कार्य प्रारंभ करना।
महाराष्ट्र में आपटा के पत्तों को प्रतीकात्मक “सोना” देकर शुभकामना देने की परंपरा प्रसिद्ध है।
क्षेत्र: उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत सहित देश के अनेक भाग।
कब: श्रावण पूर्णिमा।
महत्व: भाई-बहन के स्नेह और रक्षा-संकल्प का पर्व।
क्या करें: राखी, तिलक, मिठाई, आशीर्वाद और पारिवारिक मिलन।
क्षेत्र: पूरे भारत में अलग-अलग नामों से।
आस्था: सूर्य देव।
कब: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय; सामान्यतः 14 जनवरी के आसपास।
भारत में इसी seasonal transition के आसपास अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं:
महाराष्ट्र: मकर संक्रांति – तिलगुल
गुजरात: उत्तरायण – पतंगोत्सव
तमिलनाडु: पोंगल
असम: माघ/भोगाली बिहू
पंजाब: लोहड़ी/माघी से जुड़ा काल
उत्तर भारत: स्नान-दान और खिचड़ी परंपराएँ।
क्या करें: सूर्य अर्घ्य, तिल-गुड़, अन्न/वस्त्र दान।
मंत्र:
ॐ सूर्याय नमः।
कब: वैशाख शुक्ल तृतीया।
क्षेत्र: सम्पूर्ण भारत।
आस्था: विष्णु-लक्ष्मी सहित विभिन्न क्षेत्रीय धार्मिक परंपराएँ।
मान्यता: “अक्षय” अर्थात जिसका क्षय न हो—दान, जप और पुण्य कर्म के लिए शुभ तिथि मानी जाती है।
क्या करें: पूजा, जप, दान, जलदान, अन्नदान।
कब: आषाढ़ पूर्णिमा।
आस्था: गुरु-परंपरा; महर्षि वेदव्यास से विशेष संबंध के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
क्या करें: गुरु वंदना, अध्ययन, शास्त्र-पाठ, गुरु/शिक्षकों का सम्मान।
मंत्र:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर भारत सहित अनेक क्षेत्र।
कब: श्रावण शुक्ल पंचमी।
आस्था: नाग देवता।
क्या करें: नाग-पूजन की स्थानीय परंपराएँ; जीवों के प्रति अहिंसा।
महत्वपूर्ण बात: पूजा के नाम पर वास्तविक साँपों को पकड़ना, परेशान करना या जबरन दूध पिलाना धार्मिक आवश्यकता नहीं है।
यह तकनीकी रूप से एक अकेला “त्योहार” नहीं बल्कि श्रावण मास की शिव-उपासना परंपरा है।
देवता: भगवान शिव।
क्या करें: सोमवार व्रत, शिव अभिषेक, बिल्वपत्र, पंचाक्षरी मंत्र।
ॐ नमः शिवाय।
क्षेत्र: वाराणसी सहित उत्तर भारत; अन्य क्षेत्रों में भी कार्तिक पूर्णिमा अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
क्या करें: स्नान, दीपदान, विष्णु/शिव उपासना, दान।
इसी तिथि का Sikh धर्म में भी विशेष महत्व है क्योंकि गुरु नानक गुरपुरब का पारंपरिक आयोजन इसी समय होता है।
अब आपके मूल प्रश्न का सबसे उपयोगी हिस्सा—किस राज्य की धार्मिक पहचान में कौन-से पर्व विशेष हैं।
महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों में से एक।
देवता: श्री गणेश।
कब: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक; प्रमुख सार्वजनिक रूप 10 दिनों का माना जाता है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की सामग्री भी महाराष्ट्र के गणेशोत्सव को दस-दिवसीय उत्सव बताती है। India Culture
क्या करें: गणपति स्थापना → प्राण-प्रतिष्ठा/पूजन → आरती → नैवेद्य/मोदक → दैनिक पूजा → उत्तरपूजा → विसर्जन।
मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।
प्रसिद्ध वैदिक मंत्र:
गणानां त्वा गणपतिं हवामहे...
कब: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।
महत्व: महाराष्ट्र में नववर्षारंभ।
क्या करें: घर के बाहर गुढी स्थापित करना, पूजा, नीम आदि से जुड़ी पारंपरिक खाद्य-विधियाँ।
केंद्र: पंढरपुर।
देवता: श्री विठ्ठल-रुक्मिणी।
विशेषता: वारकरी परंपरा और पंढरपुर वारी।
व्रत: एकादशी उपवास।
नाम-जप:
राम कृष्ण हरी।
विठ्ठल विठ्ठल जय हरी विठ्ठल।
कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन विशेष लोकप्रिय।
आस्था: बाल/गोपाल कृष्ण।
विशेष रूप से महाराष्ट्र के कोकण और समुद्री समुदायों में।
आस्था: समुद्र/वरुण से जुड़ी प्रार्थना और समुद्री जीवन की सुरक्षा।
महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में महिलाएँ शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
व्रत: कई परंपराओं में कठोर/निर्जला व्रत रखा जाता है; स्वास्थ्य के अनुसार इसे कठोर रूप में करना आवश्यक नहीं।
मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
मुख्य पर्व: नवरात्रि, उत्तरायण, जन्माष्टमी, दिवाली, गुजराती नववर्ष, होली-धुलेटी।
देवी अम्बा/दुर्गा की उपासना और गरबा-डांडिया इसकी विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।
मकर संक्रांति पर पतंगोत्सव की विशेष परंपरा।
द्वारकाधीश श्रीकृष्ण से विशेष संबंध।
प्रमुख: गणगौर, तीज, गोगा नवमी, रामदेवरा मेला, होली, दिवाली।
देवी: गौरी/पार्वती तथा शिव।
कौन: विशेषतः महिलाएँ।
महत्व: वैवाहिक सौभाग्य तथा अच्छे जीवनसाथी की कामना से जुड़ी परंपराएँ।
श्रावण/मानसून और शिव-पार्वती भक्ति से जुड़ा स्त्री उत्सव।
प्रमुख: राम नवमी, जन्माष्टमी, होली, देव दीपावली, दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा, महाशिवरात्रि।
श्रीराम जन्मभूमि के कारण विशेष महत्व।
कृष्ण जन्म और ब्रज परंपरा।
बरसाना की लठमार होली सहित अनेक विशिष्ट परंपराएँ।
कार्तिक पूर्णिमा को गंगा घाटों पर विशाल दीपोत्सव।
बिहार का अत्यंत महत्वपूर्ण लोक-आस्था पर्व; पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी व्यापक।
देवता: सूर्य देव और छठी मैया की लोक-आस्था।
अवधि: चार दिन।
क्रम:
नहाय-खाय → खरना → संध्या अर्घ्य → उषा अर्घ्य।
व्रती कठोर शुद्धता और उपवास का पालन करते हैं; खरना के बाद लंबा निर्जला व्रत प्रचलित है।
विशेषता: अस्त होते सूर्य और अगले दिन उगते सूर्य—दोनों को अर्घ्य।
छठ भारत के प्रमुख Hindu festivals की सूचियों में भी शामिल है। Drik Panchang
प्रमुख: सरहुल, करमा, छठ, सोहराय।
यहाँ ध्यान देना आवश्यक है कि सरहुल/करमा/सोहराय जैसी कई परंपराओं का संबंध विशिष्ट आदिवासी/स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से भी है; इन्हें केवल “Hindu festival” कहकर उनकी स्वतंत्र पहचान मिटाना उचित नहीं।
राज्य का सबसे बड़ा धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव।
देवी: माँ दुर्गा।
मुख्य दिन: षष्ठी → सप्तमी → अष्टमी → नवमी → विजयादशमी।
महत्व: महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की विजय।
विशेष: पंडाल, प्रतिमा, धुनुची नृत्य, सिंदूर खेला और विसर्जन।
दीपावली की अमावस्या पर माँ काली की विशेष उपासना।
मंत्र: ॐ क्रीं कालिकायै नमः।
वसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की आराधना।
स्थान: पुरी।
देवता: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा।
तीनों विग्रह रथों पर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं।
भक्ति मंत्र:
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
अन्य प्रमुख पर्व: राजा पर्व, कुमार पूर्णिमा, स्नान यात्रा, कार्तिक पूर्णिमा/बोइता बंदाना।
तीन प्रमुख बिहू:
रंगाली/बोहाग बिहू — नववर्ष और वसंत
भोगाली/माघ बिहू — फसल और सामुदायिक भोज
कोंगाली/काती बिहू — कृषि और प्रार्थना से जुड़ा काल।
ध्यान रहे: बिहू Assamese सांस्कृतिक/कृषि परंपरा है और केवल किसी एक धार्मिक पहचान में सीमित नहीं।
स्थान: कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी।
आस्था: देवी कामाख्या/शक्ति परंपरा।
प्रमुख: महाशिवरात्रि, नवरात्रि, राम नवमी, जन्माष्टमी, नाग पंचमी, गणेशोत्सव।
उज्जैन के महाकालेश्वर के कारण शिवरात्रि और श्रावण की विशेष धार्मिक महत्ता है।
प्रमुख: बस्तर दशहरा, हरेली, तीजा, पोला।
यह सामान्य “रावण दहन” वाला दशहरा नहीं है।
इसकी परंपरा मुख्यतः माँ दंतेश्वरी और बस्तर की स्थानीय/आदिवासी धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है और लंबे समय तक चलने वाले अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है।
प्रमुख: शिगमो, गणेश चतुर्थी/चवथ, दिवाली।
वसंत/होली काल से जुड़ा गोवा का प्रमुख सांस्कृतिक-धार्मिक उत्सव।
प्रमुख: मैसूर दशहरा, उगादी, वरमहालक्ष्मी व्रत, गौरी-गणेश, मकर संक्रांति।
देवी चामुंडेश्वरी की उपासना का विशेष महत्व।
कर्नाटक और आंध्र-तेलंगाना की प्रमुख नववर्ष परंपरा।
कब: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।
प्रमुख: उगादी, तिरुपति ब्रह्मोत्सवम्, संक्रांति, विनायक चविथि, श्रीराम नवमी।
देवता: श्री वेंकटेश्वर।
तिरुमला की वैष्णव परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव।
महिलाओं का विशिष्ट पुष्पोत्सव।
आस्था: गौरी/देवी परंपरा से जुड़ा।
फूलों की सुंदर स्तरीय संरचना बनाकर सामूहिक पूजा/गीत होते हैं।
आस्था: महाकाली/ग्रामदेवी परंपरा।
देवी को भोजन/बोनम अर्पित करने की विशेष परंपरा।
अन्य: उगादी, संक्रांति, विनायक चविथि।
चार दिनों का प्रमुख harvest festival:
भोगी → थाई पोंगल → मट्टू पोंगल → कानुम पोंगल।
आस्था: सूर्य, कृषि, प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता।
2026 calendar में Pongal मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी दर्ज है। Drik Panchang
सूर्य मंत्र: ॐ सूर्याय नमः।
Tamil New Year।
दीपों और शिव-परंपरा से जुड़ा प्रमुख तमिल पर्व; तिरुवन्नामलाई विशेष केंद्र।
भगवान मुरुगन/कार्तिकेय की उपासना।
केरल का अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पर्व।
कथा/आस्था: राजा महाबली की स्मृति तथा वामन परंपरा से संबंध।
मुख्य आकर्षण: पूक्कलम, ओणसद्या, नौका दौड़ आदि।
Malayalam परंपरा का महत्वपूर्ण सौर नववर्ष/नवचक्र उत्सव।
Vishukkani देखना विशेष परंपरा।
केरल का प्रसिद्ध मंदिर उत्सव।
Drik Panchang की Malayalam festival collection में Onam, Vishu, Ashtami Rohini और Thrissur Pooram जैसे पर्व सूचीबद्ध हैं। Drik Panchang
प्रमुख: कुल्लू दशहरा, शिवरात्रि—विशेषतः मंडी, नवरात्रि और स्थानीय देवता मेले।
भारत के सामान्य दशहरे से इसकी परंपरा अलग है और इसका उत्सव विजयादशमी के आसपास प्रारंभ होता है।
प्रमुख: नंदा देवी राजजात/नंदा देवी उत्सव, हरेला, गंगा दशहरा, फूल देई, शिवरात्रि।
प्रकृति, हरियाली और कृषि से जुड़ा पर्व।
माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की धार्मिक स्मृति।
मंत्र: ॐ श्री गङ्गायै नमः।
हिन्दू परंपरा में विशेष रूप से:
हेरथ (महाशिवरात्रि) — कश्मीरी पंडित परंपरा
नवरात्रि/माता वैष्णो देवी
खीर भवानी मेला
हेरथ की पूजा-पद्धति सामान्य उत्तर भारतीय शिवरात्रि से कुछ अलग कश्मीरी परंपराएँ रखती है।
हिन्दू/लोक-सांस्कृतिक परंपराओं में लोहड़ी, नवरात्रि, जन्माष्टमी, दिवाली, होली महत्वपूर्ण हैं।
लोहड़ी मुख्यतः कृषि/शीत ऋतु और पंजाबी संस्कृति से जुड़ा पर्व है; इसे केवल Hindu या Sikh पर्व कहना इसकी व्यापक Punjabi cultural identity को सीमित कर सकता है।
यहाँ एक बहुत महत्वपूर्ण अंतर है।
Sikh धर्म में Hindu परंपरा की तरह “इस दिन यह मंत्र बोलने से X गुना फल” या deity-specific vrat को जोड़ना उचित नहीं होगा। Sikh धार्मिक जीवन में Gurbani, Naam Simran, Kirtan, Akhand Path, Ardas, Sangat, Pangat और Seva केंद्रीय हैं।
SGPC के अनुसार Gurpurab सामान्यतः तीन दिनों तक मनाए जा सकते हैं; Akhand Path और Nagar Kirtan जैसी परंपराएँ प्रमुख हैं। SGPC
किससे जुड़ा: गुरु नानक देव जी।
क्षेत्र: पंजाब सहित भारत और विश्वभर का Sikh समुदाय।
कब: परंपरागत रूप से कार्तिक पूर्णिमा के आसपास।
अवधि: प्रमुख आयोजन लगभग 3 दिन तक हो सकते हैं।
क्या होता है: अखंड पाठ, नगर कीर्तन, कीर्तन, कथा, लंगर और सेवा।
क्या करें: गुरुद्वारा दर्शन, Gurbani सुनना/पढ़ना, Naam Simran, सेवा और लंगर सेवा।
नाम-स्मरण:
“ਵਾਹਿਗੁਰੂ / वाहेगुरु”
कब: सामान्यतः 13 या 14 अप्रैल।
विशेष महत्व: 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना/साजना से जुड़ा ऐतिहासिक पर्व।
स्थान: आनंदपुर साहिब का विशेष महत्व।
क्या करें: गुरुद्वारा, कीर्तन, अरदास, नगर कीर्तन, सेवा, लंगर।
यह पंजाब का harvest festival भी है, इसलिए इसका धार्मिक और कृषि-सांस्कृतिक दोनों महत्व है।
SGPC इसे Vaisakhi (Khalsa Sajna Diwas) के रूप में उल्लेखित करता है। SGPC
कब: होली के आसपास/उसके बाद।
स्थान: आनंदपुर साहिब, पंजाब विशेष केंद्र।
किससे जुड़ा: गुरु गोबिंद सिंह जी और Sikh martial tradition।
क्या होता है: Gatka, घुड़सवारी, martial displays, कीर्तन, कथा, लंगर और सेवा।
इसका उद्देश्य केवल रंग खेलना नहीं बल्कि साहस, अनुशासन और सामुदायिक तैयारी की Sikh परंपरा से जुड़ा है।
दीपावली के समय मनाया जाता है।
किससे जुड़ा: गुरु हरगोबिंद साहिब जी।
Sikh परंपरा गुरु हरगोबिंद साहिब के ग्वालियर किले से मुक्त होने और उनके साथ अन्य बंदी राजाओं की मुक्ति की स्मृति से इसे जोड़ती है।
SGPC इसे Diwali/Bandi Chhor Diwas के रूप में Sikh Gurpurab tradition में उल्लेखित करता है। SGPC
क्या करें: गुरुद्वारा, Gurbani, कीर्तन, अरदास, सेवा।
जनवरी में माघ काल में।
आस्था/इतिहास: Muktsar और Chali Mukte—40 मुक्तों की स्मृति से विशेष संबंध।
स्थान: श्री मुक्तसर साहिब।
गुरुद्वारा दर्शन, कीर्तन, Gurbani और शहीदों का स्मरण।
दसवें Sikh Guru, Guru Gobind Singh Ji के प्रकाश की स्मृति।
उनसे विशेष रूप से Khalsa, साहस, आध्यात्मिक अनुशासन और Sikh इतिहास जुड़ा है।
क्या करें: Akhand Path, Nagar Kirtan, Gurbani Kirtan, Ardas, Seva।
Sikh इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण शहीदी दिवस।
गुरु अर्जन देव जी, पाँचवें Sikh Guru, की शहादत का स्मरण।
गर्मियों में छबील—ठंडा मीठा जल बाँटने की सेवा की प्रसिद्ध परंपरा है।
SGPC भी Guru Arjan Sahib के Martyrdom Day को मुख्य Sikh commemorations में गिनाता है। SGPC
नौवें Guru, Guru Tegh Bahadur Ji की शहादत की स्मृति।
Sikh परंपरा में धार्मिक स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध बलिदान के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण।
इस दिन Gurbani, Kirtan, Katha, Ardas और Seva प्रमुख हैं।
दिसंबर में विशेष स्मरण।
छोटे साहिबज़ादे: Sahibzada Zorawar Singh Ji और Sahibzada Fateh Singh Ji।
स्थान: Fatehgarh Sahib विशेष केंद्र।
इसी काल में बड़े साहिबज़ादों और माता गुजरी जी सहित गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार से जुड़े बलिदानों का स्मरण किया जाता है।
यह Sikh इतिहास में अत्यंत भावपूर्ण समय है—इसे सामान्य “festival celebration” से अधिक शहादत-स्मरण समझना उचित है।
पहला प्रकाश और Gurgaddi/गुरुता से जुड़े स्मरण दिवस Sikh calendar में महत्वपूर्ण हैं।
इन अवसरों पर Guru Granth Sahib Ji का पाठ, Gurbani Kirtan, Ardas और Seva केंद्रीय रहते हैं।
| राज्य/क्षेत्र | विशेष प्रमुख पर्व |
|---|---|
| महाराष्ट्र | गणेशोत्सव, गुढी पाडवा, आषाढ़ी एकादशी, दही हांडी |
| गुजरात | नवरात्रि/गरबा, उत्तरायण, द्वारका जन्माष्टमी |
| राजस्थान | गणगौर, तीज, गोगा नवमी |
| उत्तर प्रदेश | राम नवमी, ब्रज होली, जन्माष्टमी, देव दीपावली |
| बिहार | छठ पूजा |
| झारखंड | सरहुल, करमा, छठ, सोहराय |
| पश्चिम बंगाल | दुर्गा पूजा, काली पूजा, सरस्वती पूजा |
| ओडिशा | जगन्नाथ रथ यात्रा, राजा पर्व |
| असम | बिहू, अंबुबाची |
| मध्य प्रदेश | महाशिवरात्रि/उज्जैन, नवरात्रि |
| छत्तीसगढ़ | बस्तर दशहरा, हरेली, पोला |
| गोवा | शिगमो, गणेश चतुर्थी |
| कर्नाटक | मैसूर दशहरा, उगादी, वरमहालक्ष्मी |
| आंध्र प्रदेश | उगादी, तिरुमला ब्रह्मोत्सवम्, संक्रांति |
| तेलंगाना | बथुकम्मा, बोनालु |
| तमिलनाडु | पोंगल, पुथांडु, कार्तिगई दीपम, थाईपूसम |
| केरल | ओणम, विषु, त्रिशूर पूरम |
| हिमाचल प्रदेश | कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्रि |
| उत्तराखंड | हरेला, गंगा दशहरा, नंदा देवी उत्सव |
| जम्मू-कश्मीर | हेरथ, खीर भवानी, नवरात्रि |
| पंजाब | Vaisakhi, Gurpurabs, Hola Mohalla, Bandi Chhor, Maghi; साथ ही Lohri |
| हरियाणा | लोहड़ी, नवरात्रि, जन्माष्टमी, गीता जयंती |
| दिल्ली/NCR | नवरात्रि, रामलीला-दशहरा, जन्माष्टमी, दीपावली |
| सिक्किम | स्थानीय Buddhist परंपराओं के साथ दशैं/तिहार भी समुदायानुसार |
| मणिपुर | Yaoshang सहित स्थानीय परंपराएँ; वैष्णव समुदाय में जन्माष्टमी |
| त्रिपुरा | दुर्गा पूजा, काली पूजा, खारची जैसी क्षेत्रीय परंपराएँ |
| मेघालय | यहाँ indigenous/Christian traditions प्रमुख; Hindu समुदाय अपने पर्व मनाते हैं |
| नागालैंड | indigenous/Christian cultural festivals प्रमुख |
| मिजोरम | indigenous/Christian cultural festivals प्रमुख |
| अरुणाचल प्रदेश | अनेक indigenous faith festivals; Hindu समुदाय के सामान्य पर्व |
यह distinction जरूरी है: हर राज्य का सबसे प्रसिद्ध festival आवश्यक नहीं कि Hindu festival हो। भारत की कई आदिवासी/indigenous परंपराओं की अपनी स्वतंत्र धार्मिक पहचान है।
अलग-अलग पर्वों के articles बनाते समय इन्हें deity-wise रखा जा सकता है:
श्री गणेश:
ॐ गं गणपतये नमः।
भगवान शिव:
ॐ नमः शिवाय।
श्री विष्णु:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
श्रीराम:
ॐ श्री रामाय नमः।
श्रीकृष्ण:
ॐ कृष्णाय नमः।
हनुमानजी:
ॐ हनुमते नमः।
माँ दुर्गा:
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
महालक्ष्मी:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
माँ सरस्वती:
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
सूर्यदेव:
ॐ सूर्याय नमः।