--> 12 ज्योतिर्लिंग | भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग | Vedartham
🚩 ॐ हनुमते नमः 🚩

श्री हनुमान — शक्ति, भक्ति और साहस

संकटमोचन हनुमानजी की महिमा, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुन्दरकाण्ड, कवच, मंत्र और पावन स्तोत्रों का संग्रह

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भगवान हनुमान का परिचय

भगवान हनुमान श्रीराम के परम भक्त हैं। वे शक्ति, साहस, निष्ठा, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के आदर्श माने जाते हैं। भक्त उन्हें संकटमोचन और पवनपुत्र के नाम से स्मरण करते हैं।

🪔 श्रीराम भक्ति💪 अदम्य साहस⛰️ संजीवनी — सेवा🙏 संकटमोचन

03

हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित प्रसिद्ध हनुमान चालीसा, जिसमें हनुमानजी के गुणों, पराक्रम और श्रीराम भक्ति का वर्णन है।



हनुमान चालीसा

दोहा :
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। 
 
चौपाई :
 
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। 

दोहा :
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
04

बजरंग बाण

बजरंग बाण हनुमानजी की कृपा और संकटों से रक्षा की प्रार्थना का भक्तिपाठ है।



बजरंग बाण

दोहा : 
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

चौपाई : 
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥ 
 
दोहा : 
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥
05

सुन्दरकाण्ड

सुन्दरकाण्ड में श्रीहनुमान की लंका यात्रा, माता सीता की खोज और श्रीराम के प्रति उनकी अनुपम भक्ति का वर्णन मिलता है। सम्पूर्ण पाठ के लिए नीचे PDF लिंक दिया गया है।



सुन्दरकाण्ड

06

संकटमोचन हनुमान अष्टक

संकटमोचन हनुमान अष्टक में हनुमानजी के पराक्रम और भक्तों की सहायता से जुड़ी घटनाओं का स्मरण किया जाता है।



श्री हनुमान अष्टक

बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥१॥

देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रबि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥२॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महा मुनि साप दियो तब, चाहिय कौन बिचार बिचारो ॥३॥

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥४॥

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत न बचिहौं हम सो जु, बिना सुधि लाए इहाँ पग धारो ॥५॥

हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाए सिया सुधि प्राण उबारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥६॥

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ॥७॥

चाहत सिय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥८॥

बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो ।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ॥९॥

आनि सजीवन हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥१०॥

रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग की फांस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ॥११॥

आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत त्रास निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥१२॥

बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।
देविहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो ॥१३॥

जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥१४॥

काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुम सों नहीं जात है टारो ॥१५॥

बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥१६॥

दोहा
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥
07

हनुमान कवच

हनुमान कवच में हनुमानजी से रक्षा, साहस और निर्भयता की प्रार्थना की जाती है।



श्री हनुमान कवच

ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय ।
प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटि समप्रभाय रामदूताय स्वाहा ॥

ॐ नमो हनुमते महाबलपराक्रमाय सर्वव्याधि विनाशनाय ।
सर्वदुष्ट विनाशनाय रामदूताय स्वाहा ॥

हनुमान् पूर्वतः पातु दक्षिणे पवनात्मजः ।
प्रतीच्यां पातु रक्षोघ्न उत्तरस्यां कपिश्वरः ॥

ऊर्ध्वं पातु महावीरः अधस्तात् कपिनायकः ।
मध्ये पातु रामदूतः सर्वतः पातु पिंगलः ॥

रामदासः शिरः पातु ललाटे च महाबलः ।
नेत्रे छायापहारी च श्रोत्रे च कपिश्वरः ॥

नासिकायां वज्रनासः मुखे रामप्रियः सदा ।
जिह्वायां पिंगलः पातु कण्ठे दैत्यारिघातकः ॥

स्कन्धौ महाबलः पातु भुजौ पातु महाबलः ।
करौ पातु कपिश्रेष्ठो नखान् पातु नखायुधः ॥

वक्षः पातु रघुप्रेष्ठः पार्श्वे पातु महाबलः ।
पृष्ठे पातु सदा रामभक्तः कट्यां पातु अनिलात्मजः ॥

गुह्यं पातु महाप्राज्ञः ऊरू पातु महाबलः ।
जानुनी पातु महावीरः जंघे पातु कपिश्वरः ॥

पादौ पातु सदा वीरः सर्वाङ्गं पातु पावनः ।
इदं कवचं महापुण्यं सर्वरोगनिवारणम् ॥

यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वत्र विजयी भवेत् ।
सर्वत्र भयमुक्तः स्यात् हनुमत्प्रसादतः ॥

08

हनुमान गायत्री मंत्र

भगवान हनुमान का ध्यान और सद्बुद्धि की प्रार्थना करने वाला गायत्री मंत्र।



हनुमान गायत्री मंत्र

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि ।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥
09

हनुमान द्वादश नाम

हनुमानजी के बारह पवित्र नामों का स्मरण।



हनुमान द्वादश नाम

हनुमान अंजनासूनुः वायुपुत्रो महाबलः ।
रामेष्टः फाल्गुनसखा पिंगाक्षो अमितविक्रमः ॥
उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशकः ।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा ॥