यह नवदुर्गा की सबसे प्रेरक कथाओं में से एक है।
ब्रह्मचारिणी कौन हैं?
यह माता पार्वती का वह स्वरूप है जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की।
📖 कथा
पार्वती को ज्ञात हुआ कि पूर्वजन्म में वे सती थीं और शिव ही उनके आराध्य हैं।
उन्होंने शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने का निश्चय किया।
कथा-परंपरा में उनकी तपस्या को अत्यंत कठोर बताया गया है।
उन्होंने वर्षों तक अत्यंत सीमित आहार लिया। फिर फल छोड़े। फिर पत्तों पर जीवन बिताया।
और अंततः पत्ते भी त्याग दिए।
इसी कारण पार्वती का एक नाम पड़ा—
अपर्णा
अर्थात वह जिन्होंने तपस्या में पर्ण—पत्ता—तक ग्रहण करना छोड़ दिया।
उनका तप इतना प्रबल बताया जाता है कि देवताओं और ऋषियों ने भी उनकी साधना की प्रशंसा की।
अंततः शिव ने उनकी भक्ति स्वीकार की।
स्वरूप
माँ ब्रह्मचारिणी पैदल चलती हुई दिखाई जाती हैं।
एक हाथ में जपमाला, दूसरे में कमंडल।
न कोई सिंह, न कोई युद्ध मुद्रा, न भव्य अस्त्र।
क्योंकि यहाँ देवी की शक्ति तपस्या है।
आध्यात्मिक संदेश
ब्रह्मचारिणी का अर्थ केवल अविवाहित होना नहीं समझना चाहिए।
यहाँ भाव है—
अनुशासन + तप + एकाग्रता + लक्ष्य के प्रति समर्पण।
मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
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