॥ भगवान साईं बाबा ॥

भगवान साईं बाबा

साईं चालीसा, स्तुति एवं गायत्री

01

भगवान साईं बाबा का परिचय

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा, सबूरी, दया और सेवा का संदेश देने वाले पूजनीय संत थे। उन्होंने जाति और धर्म के भेद से ऊपर उठकर सबका मालिक एक का संदेश दिया।

भगवान साईं बाबा का भक्तिमय AI चित्र

प्रमुख शिक्षाएँ

  • श्रद्धा और सबूरी
  • सबका मालिक एक
  • सेवा, करुणा और परोपकार
  • सभी धर्मों के प्रति सम्मान
03

श्री साईं चालीसा

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चौपाई 01

शिरडी धाम विराजे साईं। भक्त हृदय में ज्योति जगाईं।

श्रद्धा सबुरी राह दिखाते। दीन दुखी के कष्ट मिटाते।

चौपाई 02

नीम वृक्ष की छाया प्यारी। बाबा की महिमा न्यारी।

द्वारकामाई धूनी जलती। प्रेम दया की गंगा बहती।

चौपाई 03

साईं नाम सुमिरन सुखकारी। मन की चिंता हरनेहारी।

सबका मालिक एक बतलाया। भेदभाव का तम मिटवाया।

चौपाई 04

भूखे को भोजन करवाते। प्यासे को जल स्वयं पिलाते।

दीन जनों के सखा कहाए। सेवा का पथ हमें सिखाए।

चौपाई 05

हिंदू मुस्लिम एक समान। सबके भीतर एक भगवान।

मंदिर मस्जिद भेद न मानें। सबमें एक ही प्रभु पहचानें।

चौपाई 06

धीरज रख मन व्यर्थ न डोले। प्रेम सहित तू साईं बोले।

श्रद्धा से जो चरण निहारे। मन के अंधियारे सब टारे।

चौपाई 07

शिरडी की वह पावन माटी। भक्तों की आशा की थाती।

द्वारकामाई शरण जो आता। प्रेम और विश्वास वह पाता।

चौपाई 08

गुरु का वचन अमोलक जानो। मन में करुणा दीपक तानो।

सत्य अहिंसा पथ अपनाओ। दीनों के तुम काम में आओ।

चौपाई 09

साईं साईं जपते रहना। छल कपट से दूर ही रहना।

मन वाणी और कर्म सँवारो। क्रोध लोभ को दूर उतारो।

चौपाई 10

दया धर्म का दीप जलाओ। भूले पथिक को राह दिखाओ।

जिसके मन में प्रेम समाया। उसने साईं को ही पाया।

चौपाई 11

बाबा की उदी का मान। भक्त हृदय में दृढ़ विश्वास।

उदी स्मरण से मन धीरज पावे। सेवा का संकल्प जगावे।

चौपाई 12

साईं चरणों का अनुराग। मन में जगाए निर्मल राग।

आशा और विश्वास बढ़ाए। जीवन में सद्भाव जगाए।

चौपाई 13

साधु जनों का आदर करना। सत्य मार्ग पर नित ही चलना।

किसी जीव को दुख न देना। साईं का उपदेश यह लेना।

चौपाई 14

ममता से सबको अपनाना। ऊँच नीच का भेद मिटाना।

दुखिया के आँसू जो पोंछे। साईं उसके मन में बसते।

चौपाई 15

साईं कथा जो प्रेम सुनाए। अपने मन को शुद्ध बनाए।

नाम स्मरण में चित्त लगावे। सद्गुण का वह फल भी पावे।

चौपाई 16

शिरडी बाबा दया के सागर। जन जन के तुम प्रेम उजागर।

नम्र हृदय से शीश नवाएँ। गुरु चरणों में ध्यान लगाएँ।

चौपाई 17

भक्त बुलाएँ साईं साईं। करुणा मन में लहर समाईं।

हर दिन सेवा भाव जगाना। अपने मन का मैल मिटाना।

चौपाई 18

धन वैभव पर गर्व न करना। निर्बल को तुम तुच्छ न कहना।

सब प्राणी में आत्मा एक। साईं देते यही विवेक।

चौपाई 19

कर्म करो तुम फल की आशा। कम रख मन की व्यर्थ अभिलाषा।

सच्ची श्रद्धा मन में लाओ। धैर्य सहित सत्कर्म निभाओ।

चौपाई 20

साईं नाम बड़ा सुखदाई। प्रेम सुधा मन में भर आई।

जो भी आए शरण तुम्हारी। उसकी सुनते विनती प्यारी।

चौपाई 21

गुरुवार को दीप जलाएँ। साईं का शुभ नाम सुनाएँ।

धूप पुष्प से मन सजाएँ। सद्विचार जीवन में लाएँ।

चौपाई 22

शांत चित्त से ध्यान लगाना। जीवन को सेवा बनाना।

दया क्षमा को मन में रखना। कठोर वचन किसी से न कहना।

चौपाई 23

साईं बाबा शिरडी वाले। प्रेम भाव के दीप उजाले।

तुमसे प्रेरित भक्त निराले। बाँटें सुख के मधुर निवाले।

चौपाई 24

आँधी आए चाहे अँधियारा। सत्य बने मन का उजियारा।

साईं पर विश्वास जो रखे। धैर्य सहित हर कठिनाई सहे।

चौपाई 25

आत्मचिंतन नित्य ही करना। गलत कर्म से सदा ही डरना।

लोभ मोह के बंधन तोड़ो। प्रेम और सेवा से नाता जोड़ो।

चौपाई 26

भक्त हृदय में प्रेम बसाओ। मन का सारा द्वेष मिटाओ।

जिसके घर में दया निवासे। साईं कृपा की आशा जागे।

चौपाई 27

निर्धन का सम्मान बढ़ाओ। भूखे को भोजन पहुँचाओ।

जो कुछ पाया बाँटते जाओ। साईं पथ के साथी बन जाओ।

चौपाई 28

बाबा की समाधि सुहानी। भक्तों की श्रद्धा की निशानी।

शिरडी धाम जो दर्शन पाता। मन में भक्ति भाव जगाता।

चौपाई 29

भजन करो पर कर्म न भूलो। सेवा से तुम कभी न चूको।

दूसरों की पीड़ा समझो। साईं की यह सीख सदा रखो।

चौपाई 30

क्रोध अहंकार दूर भगाओ। विनय भाव से जीवन सजाओ।

साईं साईं मन में बोलो। सत्य प्रेम के द्वार को खोलो।

चौपाई 31

कठिन समय में धीरज धरना। प्रभु का सुमिरन नित ही करना।

साईं स्मृति मन को सँभाले। शुभ संकल्प की राह निकाले।

चौपाई 32

हरि अल्लाह एक पुकारो। मानवता का मान सँवारो।

साईं का संदेश निराला। प्रेम सभी का रखवाला।

चौपाई 33

मात पिता का मान बढ़ाओ। गुरु जन का आशीष कमाओ।

बाल वृद्ध सबको अपनाओ। साईं सेवा धर्म निभाओ।

चौपाई 34

द्वारकामाई पावन धाम। जहाँ गूँजता साईं नाम।

धूनी की वह स्मृति जगाती। अंतर्मन में ज्योति जलाती।

चौपाई 35

मन का संशय दूर हटाओ। शुभ विचार को पास बुलाओ।

साईं चरणों में मन रखकर। चलो सदा तुम सत्य पकड़कर।

चौपाई 36

आदर दो हर जीव को भाई। सबमें देखो छवि साईं।

सच्चे मन से जो सेवा करता। मन में सुख का दीपक धरता।

चौपाई 37

वाणी मधुर और चित्त उदार। बनता जीवन का आधार।

साईं स्मरण कर प्रेम बढ़ाओ। जग में सद्भाव फैलाओ।

चौपाई 38

संकट में भी आशा रखना। मन में दृढ़ विश्वास ही रखना।

बाबा की शिक्षा को मानो। धीरज का तुम मर्म पहचानो।

चौपाई 39

साईं साईं नाम पुकारें। श्रद्धा के हम दीप सँवारें।

सत्य दया की राह अपनाएँ। सबके हित की बात बढ़ाएँ।

चौपाई 40

शिरडी के प्रभु साईं बाबा। तुमसे प्रेम हमारा नाता।

नमन करें हम बारंबार। हो सबके मन में सद्विचार।

॥ श्री साईंनाथ महाराज की जय ॥

04

श्री साईं नाम-स्तुति

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ॐ श्री साईंनाथाय नमः।

ॐ श्री शिरडीवासिने नमः।

ॐ श्री सद्गुरु साईंनाथाय नमः।

ॐ श्री भक्तवत्सलाय नमः।

ॐ श्री करुणासागराय नमः।

ॐ श्री सर्वधर्मसमभावप्रदाय नमः।

॥ श्री साईंनाथ महाराज की जय ॥

05

श्री साईं गायत्री

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ॐ शिरडीवासाय विद्महे।

सच्चिदानन्दाय धीमहि।

तन्नः साईं प्रचोदयात्॥

ॐ साईं राम। ॐ साईं राम।