🌼 ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः 🌼

माँ सरस्वती — ज्ञान, विद्या और संगीत

श्री सरस्वती स्तोत्रम्, सरस्वती अष्टकम् और सरस्वती गायत्री मंत्र का पावन हिन्दी संग्रह

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माँ सरस्वती का परिचय

ज्ञान, संगीत, वाणी और कलाओं की अधिष्ठात्री माँ शारदा का पावन स्वरूप।

माँ सरस्वती ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत, कला और विवेक की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। उनकी उपासना विशेष रूप से वसंत पंचमी, विद्यारम्भ और अध्ययन के अवसर पर की जाती है।

🎼 वीणावादिनी📖 विद्या और ज्ञान🦢 हंसवाहिनी🌼 वसंत पंचमी

माँ सरस्वती का श्वेत स्वरूप निर्मलता और विवेक का प्रतीक है। वीणा संगीत और कला का, पुस्तक ज्ञान का तथा हंस विवेक का स्मरण कराता है।

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श्री सरस्वती स्तोत्रम् — वन्दना

माँ शारदा की प्रसिद्ध वन्दना के तीन प्रचलित श्लोक, जिनमें उनकी निर्मलता, वीणा और ज्ञानदायिनी शक्ति का स्मरण किया जाता है।

॥ श्री सरस्वती वन्दना स्तोत्रम् ॥

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।
विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते॥३॥

॥ इति सरस्वती वन्दना ॥
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श्री सरस्वती अष्टकम्

आठ श्लोकों का संवादात्मक सरस्वती अष्टकम्, जिसे पद्मपुराण से संबद्ध परंपरा में प्रस्तुत किया जाता है।

॥ श्रीसरस्वत्यष्टकम् ॥

॥ शतानीक उवाच ॥
महामते महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद।
अक्षीणकर्मबन्धस्तु पुरुषो द्विजसत्तम॥१॥

मरणे यज्जपेज्जाप्यं यं च भावमनुस्मरन्।
परं पदमवाप्नोति तन्मे ब्रूहि महामुने॥२॥

॥ शौनक उवाच ॥
इदमेव महाराज पृष्टवांस्ते पितामहः।
भीष्मं धर्मविदां श्रेष्ठं धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः॥३॥

॥ युधिष्ठिर उवाच ॥
पितामह महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारदः।
बृहस्पतिस्तुता देवी वागीशेन महात्मना।
आत्मानं दर्शयामास सूर्यकोटिसमप्रभम्॥४॥

॥ सरस्वत्युवाच ॥
वरं वृणीष्व भद्रं ते यत्ते मनसि विद्यते।
॥ बृहस्पतिरुवाच ॥
यदि मे वरदा देवि दिव्यज्ञानं प्रयच्छ नः॥५॥

॥ देव्युवाच ॥
हन्त ते निर्मलं ज्ञानं कुमतिध्वंसकारणम्।
स्तोत्रेणानेन ये भक्त्या मां स्तुवन्ति मनीषिणः॥६॥

॥ बृहस्पतिरुवाच ॥
लभते परमं ज्ञानं यत्परैरपि दुर्लभम्।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥७॥

॥ सरस्वत्युवाच ॥
त्रिसन्ध्यं प्रयतो नित्यं पठेदष्टकमुत्तमम्।
तस्य कण्ठे सदा वासं करिष्यामि न संशयः॥८॥

॥ इति श्रीसरस्वती अष्टकम् सम्पूर्णम् ॥
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श्री सरस्वती गायत्री मंत्र

विद्या, वाणी और विवेक की प्रार्थना का एक प्रचलित सरस्वती गायत्री मंत्र।

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे विरिञ्चिपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥